अज़मेर दरगाह पर सिर टेकता मूर्ख हिंदू
जिसको पता ना सनातन का एक भी बिंदु
लेखिका डॉ हर्ष प्रभा
कल सड़क पर मैंने कुछ लड़कों को गाना गाते हुए देखा, और सुन कर मुझे आवाज तो बहुत अच्छी लगी, लेकिन साथ में यह अफसोस भी हुआ, कि युवा पीढ़ी न जाने इस तरफ जा रही है, इसमें इन युवा बच्चों की कोई गलती नहीं है, इसमें सबसे अधिक जिम्मेदार बॉलीवुड है जो उल्टा सीधा लोगों को परोसता हुआ आ है,और गलती है हमारे बुजुर्गों की,क्योंकि यह बच्चे तो वही सीख रहे हैं, जो इनको इनके बुजुर्गों ने सिखाया, और बुजुर्गों की भी मैं गलती क्यों कहूं,उनको इतिहास ने जो पढ़ाया,मूर्ख हिंदू देखा देखी भेड़ा चाल में फसता हुआ शुरू से नजर आया!
15 फरवरी 2008 में फिल्मकार आशुतोष गोवारिकर की फिल्म, इनके जन्म दिवस के शुभ अवसर पर रिलीज हुई थी, जिस फिल्म का नाम था "जोधा अकबर"! जिसमें मुख्य कलाकार की भूमिका में रितिक रोशन और विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय थी! दोनों ही कमाल की एक्टिंग करते हैं इसमें कोई शक नहीं है,लेकिन मुझे शक इनकी नियत पर है, कि ये पैसे कमाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते है!और किसी भी हद तक गिरे भी क्यों ना ये लोग, क्योंकि इनको अमीर आदमी जो बनना है,चाहे उसके लिए इन्हे कुछ भी बना दो,उस काम में तो ये उसस्तादो के भी उस्ताद है! और फिर इन उस्तादों को देख कर हमारे बच्चे उस्ताद बनने की कोशिश करते हैं, इनकी ही तरह इनकी नकल करके!
मैं बात कर रही हूं जोधा अकबर फिल्म के इस गाने की जिसको न जाने कितने बच्चे पूरी तलींता के साथ और मंत्रमुग्ध होकर 2008 से गाते हुए आ रहे! गाने के बोल है, *ख्वाजा जी... ख्वाजा जी... या गरीब नवाज... या गरीब नवाज... मोइनुद्दीन" या ख्वाजा जी, ख्वाजा मेरे ख्वाजा दिल में समा जा अली का दुलारा*
तो कौन है यह "ख्वाजा मोइनुद्दीन चिस्ती अली का दुलारा" क्या कभी आपने उसके बारे में जानने की कोशिश की, या भेड़ा चाल के शिकार आप भी तो नहीं हो चूके हो,अपने बुजुर्गों की तरह! इसलिए ही कहते हैं कि हिंदू को मूर्ख बनाना आसान है!
इस अली के दुलारे ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का जन्म 1141 ई. में ईरान के सिजिस्तान (वर्तमान में सिस्तान) में हुआ था!जोकि 1192 ई. में मोहम्मद गोरी (जिसको मोहम्मद बिन कासिम) भी कहते थे, उसके साथ भारत आया था, जब मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराकर दिल्ली में अपना शासन स्थापित कर लिया था! ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का उद्देश्य भारत में आने का सिर्फ एक ही था, कि हिंदू लोगों को किस तरह से मूर्ख बनाया जाए और उनका धर्म परिवर्तन कराया जाए, इसी उद्देश्य से उसको भारत भेजा गया था! और वह जब तक भारत में रहा, अपने इस साजिश में कामयाब भी रहा, उसने भारत में रहते हुए 7 लाख हिंदुओं को मुस्लमान बनाया उनका धर्म परिवर्तन करा कर! मजलिस सूफिया नामक ग्रंथ के अनुसार जब वह मक्का हज करने गया तो उसे यह निर्देश दिया गया, कि वह हिंदुस्तान जाए और वहां इस्लाम राज्य स्थापित करें!
इसी मोइनुद्दीन चिश्ती ने जिस की दरगाह पर तुम हिंदू चादर चढ़ाने के लिए अजमेर शरीफ जाते हो, इसने मारकत इसरार नामक ग्रंथ के अनुसार तीसरी शादी एक हिंदू लड़की को जबरन धर्म परिवर्तन करा कर उससे शादी की थी, जबकि वह लड़की ना धर्म परिवर्तन करना चाहती थी और ना ही इस मोइनुद्दीन चिश्ती से शादी करना चाहती थी, लेकिन मोइनुद्दीन चिश्ती ने इस लड़की के पिता को युद्ध में परास्त कर, इस लड़की से जबरन निकाह किया, इस लड़की का नाम इसने उन्माद अल्लाह रखा, इससे पैदा हुई पुत्री का नाम फिजा जमाल रखा जिसकी मजार अजमेर चिश्ती की दरगाह में मौजूद है!
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की मैनेजमेंट कमेटी के इस समय 11,000 वंशज है इन सब को ही मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव में वोट डालने का अधिकार है और उन्हीं परिवारों में से यहां कि मैनेजमेंट कमेटी बनाई जाती है!
कहने का मतलब सिर्फ मेरा इतना है कि जिस व्यक्ति ने लाखों लोगों को जबरन हिंदुओं से मुसलमान बनाया, जबरन हिंदू लड़कियों से शादी करके उनको गुलाम बनाया, और आप हिंदू मूर्ख उसी की दरगाह पर जाकर, अपने खून पसीने की कमाई को, उस पर लुटा रहे हैं, उस लुटेरे से ही आशीर्वाद लेने के लिए, उस पर चादर चढ़ा रहे हैं, कि आप हमें आशीर्वाद दो,ताकि हम हिंदू और मूर्ख बनते रहे सदियों तक! ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाने वाले कोई भी अनपढ़ हिंदू नही है, सब पढ़े लिखे प्रोफेसर और अच्छे परिवारों के लोग हैं, जब इतना पढ़ा-लिखा हिंदू मूर्ख बन सकता है, तो फिर मैं अनपढ़ हिंदुओं की तो क्या बात करूं, उनको तो मूर्ख बनाना और भी आसान है!
इसलिए अपने मंदिरों में जाकर अपनी सनातन संस्कृति के बारे में जानने की कोशिश करो, और अगर आपको आशीर्वाद लेना ही है, तो पूरे भारत में सनातन मंदिर है ना उनमें जाओ आशीर्वाद लेने!
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