देश की अनूठी परम्परा है बुन्देलखण्ड की दीवारी,
परीवा पर बुन्देलखण्डी दीवारी नृत्य की रही धूम
बांदा(राम आसरे)। बुंदेलखण्ड की धरती में अभी भी पुरातन परंपराओं की महक रची बसी है। बुंदेली दिवारी देश भर में अनूठी है। यही वजह है कि यहां के दिवारी कलाकार दूर दूर तक जलवा बिखेर रहे हैं। बामदेव की नगरी से श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या के दीपोत्सव कार्यक्रम में यहां के कलाकारों ने जलवा बिखेरा। इन कलाकारों को विशेष सचिव संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश ने सम्मानित कर उत्साहवर्धन किया।
पूरे बुंदेलखण्ड में दीपमालिका पर्व पर दिवारी गायन और नृत्य और मौन चराने की अनूठी पंरपरा देखते ही बनती है। दिवाली के मौके पर मौन चराने वाले मौनिया सर्वाधिक आर्कषण का केन्द्र रहते हैं। इसके साथ ही रंग बिरंगे परिधानों में दिवारी खेलते कलाकार अपने आप में अलग नजर आते हैं। यही वजह है कि यहां के दिवारी कलाकार और दिवारी देश भर में अलग पहचान बनाए हुए हैं। इसी कडी़ में श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या में विगत दिनों दिवारी कलाकारों ने धमाल मचाया। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के विशेष सचिव आनंद कुमार ने कहा कि अनूठी है बुंदेलखण्ड की दिवारी। बुंदेलखण्ड के कलाकारों को उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के द्वारा सम्मानित किया गया। बुंदेलखण्ड दिवारी कलाकार प्रमुख रमेश पाल ने बताया कि संस्कृति विभाग के विशेष सचिव आनंद कुमार के द्वारा बुंदेली कलाकारों को अयोध्या दीपोत्सव में बुलाया गया था। वहां 16 सदस्यी दिवारी टीम के कलाकारों को उनके द्वारा सम्मानित कर उत्सावहर्धन किया गया। दीपोत्सव के साक्षी बने बुंदेली कलाकार अयोध्या में आयोजित किए जा रहे दीपोत्सव कार्यक्रम में बुंदेलखण्ड के दिवारी कलाकारों ने रंग बिरंगे परिधानों में सज धज कर लाठियां चटकाते हुए खूब वाहवाही लूटी। बुंदेलखण्ड से दिवारी कलाकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे टीम प्रमुख रमेश पाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग के द्वारा उन्हें आमंत्रित किया गया था। जिसमें अयोध्या में दो दिनों तक उनके सह कलाकारों ने दिवारी का प्रदर्शन किया साथ ही आयोजित शोभायात्रा में प्रतिभाग किया। बताया कि नौ लाख दियों से अयोध्या जगमगा गई।
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