पलाश पर कमलेश सिंह का 9 वर्ष संघर्ष :

पलाश पर कमलेश सिंह 

का 9 वर्ष संघर्ष :


पलामू को विरासत में मिली पलाश ईश्वरीय वरदान है, कभी लाखो लोगो की जीविका का साधन था। लेकिन समय बिता सरकारी उदासीनता ने इस व्यवसाय को पलामू से ही खत्म कर दिया।

समय ने फिर करवट लिया और युवा कमलेश सिंह और टीम ने इसे फिर उठाया। कुन्दरी लाह बगान के 35000 लाह पोषक वृक्षो को लाखों तक पहुंचाया, इसे रोजगार से जोड़ने के लिए जिला, प्रदेश दिल्ली तक एक कर दिया। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का पूरा सहयोग मिला, अंततः सफलता मिली और गुलाल फेक्ट्री, लाह उत्पादन, इसके उत्पाद के प्रशिक्षण भी हुआ। लेकिन पुनः काल की छाया पड़ी और भ्रष्ट अधिकारियों की नीयत खराब हुई और फिर पलाश उदास हो गया। आंदोलन भी हुए, लेकिन आश्वासन ही मिला, निष्कर्ष कुछ नही। संरक्षण करने वाले लोगो को सरकारी ताकतों ने किनारे किया और सब बर्बाद, चाहे पूर्व उपायुक्त शांतनु अग्रहरि हो या शशि रंजन, वन विभाग ने तो लुटा ही, JSLPS के अधिकारी भी ग्रामीणों को लाभ न देकर खुद हजम करने में व्यस्त हैं। वह क्षेत्र में पदस्थापित वन विभाग के रेंजर जितेंद्र हाजरा, फोरेस्टर महाराज सिंह, वनरक्षी मोहफीज अंसारी गबन और वनों की अवैध कटाई के आरोप में सस्पेंड हैं। दैनिक मजदूर निर्जल महतो, कृष्णा राम और वनाधिकारी जमीन और मकान खरीदने में व्यस्त हैं। पूरा कुन्दरी वन क्षेत्र को ही चारागाह बना दिया है। लेस्लीगंज थाने की तो बात ही निराली है, बताते भी हंसी आती है 😂 आइए विधायिका के तीन टर्म को जानते हैं कमलेश सिंह की जुबानी किसने क्या किया ...

पार्ट - 1

तत्कालीन विधायक स्व विदेश सिंह

जब कुन्दरी लाह बगान के विकास के लिए पहली बैठक फरवरी 2013 में ही हज़ारो की संख्या में ग्रामीण उपस्थित हुए थे और इसके मुख्य अतिथि पलामू के विकास पुरुष पांकी विधायक आदरणीय श्री विदेश सिंह थे। इसी दिन महिलाओं को सिलाई सीखने के लिए एक सेंटर का भी उद्घाटन किया गया था, जिसमे 4 वर्ष में करीब करीब 450 महिला/बच्चियों ने सीखा और आज अपनी जीविका चला रही हैं। कुन्दरी लाह बागान के सम्पूर्ण विकास को देखते हुए विकास पुरुष ने कहा था कि कार्य की नींव एक बार रखी जाती है लेकिन इसे पूरा करने के लिए जीवन भर संघर्ष करना पड़ता है, यह काम अगर सफल होगा तो पलामू का पूर्ण विकास भी होगा और सबसे बड़ी बात की इस कुन्दरी गांव का कायाकल्प हो जाएगा, रोजगार के लिए लड़को को दिल्ली - पंजाब भटकना नही पड़ेगा। समय बिता और उनका काफी सहयोग भी मिला लेकिन समय के काल ने असमय उन्हें स्वर्गलोक में बुलाया😭, लेकिन कार्य चलता रहा, कई अड़चने आई, लेकिन जिला उपायुक्त का श्री अमित कुमार ने भी भरपूर सहयोग किया और पलाश की प्रसिद्धि केंद्र तक पहुंची और झारखण्ड और बिहार का पहली गुलाल यूनिट की स्थापना, लाह फैक्ट्री की स्थापना, आहर मरम्मती, भवन निर्माण और कई स्वरोजगार से जुड़ा प्रशिक्षण भी हुआ। सफलता कदम चूम रही थी, आखिर हज़ारो लोगो का परिश्रम और आशीर्वाद जो था ...

पार्ट -2

तत्कालीन विधायक बिट्टू सिंह

कुन्दरी लाह बगान के विकास की नई गाथा लिखी जा रही थी, पलामू का खोया हुआ पहचान ... पलाश, अंतरराष्ट्रीय ख्याति की ओर अग्रसर हो चुका था। केंद्र, राज्य, जिला, प्रखंड, सभी एकाग्रचित्त होकर पलाश को नई पहचान दिलाने में व्यस्त थे। लाखो लाख रुपए सरकार आवंटन कर रही थी ... अचानक वन विभाग की हड़प नीति सामने आना शुरू होता है, आवंटित रुपए को मनमाने तरीके से खर्च करने के लिए लालायित हो जाता है और कुछ बिचौलियों के सहयोग से सफल भी होता है। इस बात की जानकारी तत्कालीन विधायक बिट्टू सिंह को अवगत करा कर हस्तक्षेप करने की मांग किया गया, लेकिन ... मौन ... मौन ... मौन, फिर विधानसभा में हो रहे भ्रस्टाचार को उठाने के लिए कहा तो मार्च बजट सेशन में उठाया देंगे की बात कही, बीच मे कई बार उनको स्मरण भी कराए ... फिर बजट सेशन के दौरान कहा गया कि प्रश्न उठा दिया गया और मुख्यमंत्री से बात भी हो गई है जांच होगा .. मन गदगद हो गया। लेकिन यह क्या ... ? जब पता करने लगे तो प्रश्न ही गायब, उनके निजी सहायक श्री विष्णुदेव दुबे से बात किये तो पता चला कि उनको विधायक ने कहा ही नही है ...ले तेरी के इतना झूठ, वह भी अपनो से, जो आपका वोटर है, आपका विधानसभा क्षेत्र है और आपका ही जनता है। मन खिन्न हो गया ... यह कैसी राजनीति ???

पार्ट - 3

वर्तमान विधायक डॉ शशिभूषण मेहता

कुन्दरी लाह बागान के संघर्ष की लड़ाई तीव्रता से चल रही थी, कुन्दरी ग्राम से लेकर, जिला मुख्यालय, प्रदेश मुख्यालय यहां तक कि दिल्ली तक हमलोग एक किए हुए थे। इसी दौरान

हमने और हमारी टीम के सहयोगी विनोद कुमार, राजेश पाल और अन्य ने भी कई बार वर्तमान विधायक डॉ शशिभूषण मेहता से कुन्दरी लाह बगान से होने वाले लाभ और वर्तमान में हो रही भ्रस्टाचार से भी अवगत कराया। उनके द्वारा भी खूब बड़का वाला आश्वासन मिला ... ये करेंगे ... वो करेंगे ... फलना ... ढिकाना ... हम भी बड़े खुश हुए, इस बार पांकी के विधायक हज़ारो लोगो के रोजगार से जुड़ा विषय को उठाएंगे और इंसाफ दिलवाएंगे। लेकिन ले ... ई का ... टाय टाय फिस्सस, काहे की ई ग्रामीणों के रोजगार से जुड़ा मामला था

पार्ट - 4

वर्तमान सांसद श्री सुनील कुमार सिंह

सभी सीढियां बन्द होती है तो उम्मीद की किरण रास्ते बना देती है, लेकिन जब विश्वास टूटता है तो सब कुछ खत्म भी होता है। यही घटना होता है चतरा लोकसभा के सांसद श्री सुनील कुमार सिंह जी के द्वारा। इनके द्वारा विरोध को देखते हुए लोकसभा में भी प्रश्न उठाया जाता है मात्र दिखावटी और जनता को गुमराह करने के लिए, निष्कर्ष कुछ नही होता। कई बार तो इन्होंने दिल्ली में कमलेश सिंह को बुलाया भी और नजरअंदाज भी किया। ऐसे जनप्रतिनिधि होना न होना दोनो बराबर है। इनका निवास वर्ष में ग्यारह महीना दिल्ली के एयर कंडीशनर कमरे ही होता है। चूंकि इनका पैतृक घर बिहार जिले में है तो झारखण्ड से इनका कोई विशेष लगाव नही बस दिखावटी है।

अब तो बस उम्मीद की किरण पलामू वासी ही दिखते हैं। एक बार पुनः नए वर्ष 2023 में इस पलामू की पहचान पलाश और यहां की जुड़ी समस्याएं बेरोजगारी, पलायन, भुखमरी इत्यादि से निपटने के लिए प्रयास शुरू किया जा रहा है, आप सभी पलामू वासी, मीडिया कर्मी, आम नागरिक से अनुरोध होगा कि इस मुहिम में आगे आए और मदद करें ताकि आपके आने वाले पीढ़ी का भविष्य सुखमय हो सकें।

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