’जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के 726वें प्राकट्य महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ’

’जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के 

726वें प्राकट्य महोत्सव में शामिल

हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ’




मुख्यमंत्री की घोषणा-जिस स्थल पर रामानंदाचार्य प्रकट हुए, वहां बनेगा स्मारक व मंदिर’।

’बांटने वाले कभी हितैषी नहीं हो सकते, सत्ता में आने पर अराजकता, सनातन धर्म पर प्रहार और दंगों की आड़ में हर व्यक्ति को झुलसाएंगेः योगी आदित्यनाथ’।

’पौष पूर्णिमा पर 31 लाख श्रद्धालु आए, पिछले पांच-छह दिन में एक करोड़ श्रद्धालु कर चुके हैं स्नानः मुख्यमंत्री’।

प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेले क्षेत्र में स्थित जगद्गुरू महामण्डलेश्वर संतोषदास उर्फ सतुआ बाबा के शिविर में आयोजित श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य के 726वें प्राकट्य महोत्सव में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरू रामानन्दाचार्य भगवान के 726वें पावन प्राकट्य के अवसर पर उन्हें तथा पूज्य संतों एवं प्रयागराज त्रिवेणी की पावनधरा को कोटि-कोटि नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जगतगुरू रामानन्दाचार्य ईश्वरीय गुणों से परिपूर्ण थे। कहा कि एक महामानव की दृष्टि दिव्य होती है, लोगो के कल्याण की होती है तथा धर्म के प्रति जागरूकता की होती है। उन्होंने कहा कि देश व दुनिया से लोग आकर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाते है और अपने जीवन के आदि दैविक, आध्यात्मिक, भौतिक तीनों तापों के मुक्त होने के संकल्प के साथ आगे बढ़ते है।

’धर्म, न्याय व ज्ञान की धरा है प्रयागराज’

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज की पावन धरा को कभी महर्षि भारद्वाज, महर्षि वाल्मीकि व अन्य पूज्य ऋषियों व महर्षियों ने अपने तप व साधना से सनातन धर्म के केंद्र के रूप में विकसित किया था। त्रिवेणी की इस पावन धरा पर 726 वर्ष पूर्व भक्ति शिरोमणि भगवान रामानंदाचार्य प्रकट हुए थे। प्रयागराज की पावन धरा, भगवान वेणी माधव की अपार कृपा से, भगवान अक्षयवट के सानिध्य में, त्रिवेणी का वह रूप जिसे हम मां गंगा, मां यमुना व मां सरस्वती के रूप में स्मरण करते हैं, देश-दुनिया से श्रद्धालु यहां आकर संगम में डुबकी लगाते हैं। यहां धर्म, न्याय और ज्ञान भी है। तीनों को लेकर देश भर के अलग-अलग जिज्ञासु इस पावन धरा पर उपस्थित होते हैं।

जिस स्थल पर रामानंदाचार्य जी प्रकट हुए, वहां बनेगा स्मारक व मंदिर

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा ने की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन्होंने सभी संत-महात्माओं को जोड़ने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामानंदाचार्य जी महाराज ने बंटे समाज को जोड़ने का कार्य किया था, इसलिए सभी लोग उनकी प्रेरणा को जीवन का मंत्र बनाएं। भगवान रामानंदाचार्य की पावन जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी संतों का आह्वान किया कि सभी लोग मिलकर दारागंज में जिस परिवार में व जिस स्थल पर रामानंदाचार्य जी प्रकट हुए थे, वहां उनका स्मारक व मंदिर बनायेे, सरकार उसमें हर प्रकार से सहयोग करेगी।

’बांटने वाले कभी हितैषी नहीं हो सकते’

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आज भी समाज को बांट रहे हैं, वे कभी किसी के हितैषी नहीं होंगे। पहचान का संकट, अराजकता, सनातन धर्म पर प्रहार और दंगों की आड़ में फिर हर व्यक्ति को झुलसाएंगे। हमें इसकी पुनरावृत्ति नहीं होने देनी चाहिए। डबल इंजन सरकार सनातन आस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए सदैव खड़ी है। बांटने, तोड़ने वाले और कमजोर करने वाले लोगों को कभी पनपने न दें। हम सभी इस संकल्प के साथ बढ़ेंगे तो आने वाला समय सनातन धर्म का है। जिस तरह राम मंदिर पर ध्वज लहरा रहा है, उसी तरह दुनिया के अंदर सनातन का झंडा फहराता रहेगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेकुलरिज्म के नाम पर बांटने वालों से बचने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जाति, मत-संप्रदाय के आधार पर विभाजन हमारे लिए उसी प्रकार से सर्वनाश का कारण बन जाएगा, जैसे आज बांग्लादेश के अंदर देख रहे हैं।

’ईश्वरीय गुणों से भरपूर महामानव की दृष्टि परमार्थ के लिए होती है’

मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य का जिक्र करते हुए कहा कि कोई अचानक महान नहीं बनता। महानता के लिए दिव्य गुणों को आत्मसात करने का सामर्थ्य, दृढ़ इच्छाशक्ति, दृष्टि भी होनी चाहिए। सामान्य मनुष्य केवल अपने व परिवार के लिए सोचता है, उसकी दुनिया परिवार तक सीमित रहती है, लेकिन ईश्वरीय गुणों से भरपूर महामानव की दृष्टि दिव्य, कल्याण व धर्म के प्रति जागरूक करने की होती है। उनके भाव स्वयं और स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि परमार्थ के लिए होते हैं। इस धराधाम पर यही कार्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य भगवान ने किया था।

’रामानंदाचार्य ने दी प्रेरणा, मत-संप्रदाय के आधार पर मत बंटो’

मुख्यमंत्री ने कहा कि 726 वर्ष पूर्व कालखंड ऐसा था, जब आक्रमणकारी सनातन धर्म को रौंदना चाहते थे। विदेशी आक्रांताओं द्वारा समाज को तोड़ने, जाति के नाम पर बांटने, अनेक वादों के आधार पर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भन्न करने की साजिश हो रही थी। उस समय मत-संप्रदायों को एकजुट करने का आह्वान रामानंदाचार्य ने किया था। उन्होंने कहा कि सभी जन ईश्वर के चरणों में शरणागत के सदैव अधिकारी हैं। मत-संप्रदाय के आधार पर मत बंटो। भगवान रामानंदाचार्य ने समाज को जोड़ने के लिए अलग अलग जातियों से द्वादश शिष्य (अनंताचार्य, कबीर दास, सद्गुरु रविदास, सदगुरु पीपा, सुरसुरानंद, सुखानंद, नरहर्यानंद, योगानंद, भावानंद, धन्ना, सैन व गैलवानंद महाराज) बनाए। रामानंद परंपरा से निकलीं अलग-अलग धाराएं आज भी समाज को जोड़ती हैं। इस मंच पर अनेक परंपरा के संतों की उपस्थिति सनातन धर्म की एकता का उद्घोष कर रही है। मुख्यमंत्री ने रविदासी संप्रदाय, कबीर दास समेत विभिन्न परंपराओं के संतों की उपासना भाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज ने उपासना विधि (सगुण व निर्गुण) के शिष्य दिए। उन्होंने बंटे समाज को जोड़ने का उद्घोष किया था।

’समाज को जोड़ने की युक्ति करता है संत’

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज को जोड़ने के लिए पूरी युक्ति करता है, जब संत समाज एक मंच पर जाकर उद्घोष करता है तो परिणाम भी आता है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूज्य संतों की साधना, एकता का परिणाम है, जिसे मूर्त रूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया। 1952 में पहला आम चुनाव हुआ, तबसे देश ने कई प्रधानमंत्री देखे। सभी ने देश के विकास में योगदान दिया, लेकिन अयोध्या की मूल आत्मा को सम्मान मिलना चाहिए और फिर से रामलला विराजमान होने चाहिए, इस भाव को मूर्त रूप देकर प्रधानमंत्री ने भारत की परंपरा को गौरवान्वित किया। मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने राम मंदिर का दर्शन किया। वे शिलान्यास, प्राण-प्रतिष्ठा व मंदिर निर्माण होने के उपरांत सनातन धर्म की ध्वजा पताका के आरोहण समारोह में भी पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया को दिखा दिया कि कार्य करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

’पिछले पांच-छह दिन में एक करोड़ श्रद्धालु कर चुके संगम स्नान’

मुख्यमंत्री ने मां त्रिवेणी में स्नान कर मां गंगा, मां यमुना व मां सरस्वती के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की। उन्होंने कहा कि आज से 8-10 साल पहले यहां की स्थिति ऐसी नहीं थी, लेकिन जब राम और गंगा भक्त देश की सत्ता में रहता है तो ऐसा अवसर प्राप्त होता है। प्रधानमंत्री ने नमामि गंगे के माध्यम से गंगा के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की, यह कार्य केवल भारत का सच्चा पुत्र ही कर सकता है। स्नान करने वाला प्रत्येक व्यक्ति उनके प्रति आशीर्वाद व आभार प्रकट कर रहा है। सीएम योगी ने कहा कि माघ मेला में पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व पर लगभग 31 लाख श्रद्धालु आए और पिछले पांच-छह दिनों में एक करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं।
इस अवसर पर संतोषाचार्य महाराज ‘सतुआ बाबा’ ने सभी संत-महात्माओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह वहीं पावन धाम है, जहां पर आज के दिन 726 वर्ष पूर्व जगद्गुरू रामानन्दाचार्य जी महाराज का प्राकट्य हुआ था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व व निर्देशन में महाकुम्भ का सफल आयोजन हुआ, जिसमें देश व दुनिया के 66 करोड़ से अधिक लोगो ने त्रिवेणी संगम में श्रद्धा की डुबकी लगायी थी। मुख्यमंत्री ने माघ मेले के आयोजन को विकास के साथ जोड़ा है। कहा कि जगद्गुरू रामानन्दाचार्य जी का उद्घोष था कि ‘‘जाति-पाति पूछे नहीं कोई, जो हरि को भजे वह हरि का होई’’,। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के अथक प्रयास से आज गंगा का जल शुद्ध, पवित्र एवं निर्मल है तथा आचमन एवं स्नान योग्य है।
इस अवसर पर वैदेही वल्लभ देवाचार्य महाराज ने मेले में की गयी व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश का सर्वांगीण विकास हो रहा है। उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए संतोषदास महाराज जी का अभिनंदन किया।
इस अवसर पर विद्या चैतन्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में माघ मेला, कुम्भ मेला और महाकुम्भ मेला का भव्य एवं दिव्य रूप से आयोजन सम्पन्न कराया जा रहा है। मेले में आने वाले संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं व पर्यटकों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आज गंगा-यमुना में स्वच्छ एवं पर्याप्त मात्रा में जल की उपलब्धता बनी हुई है। कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का तेजी के साथ विकास हुआ है। उन्होंने देश के विकास के लिए सभी से मिलकर चलने का आह्वाहन किया।
इस अवसर पर खाकचौक व्यवस्था समिति के अध्यक्ष ने कहा कि आज हमारे देश का यह सौभाग्य है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ है। उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर है जब जगद्गुरू रामानन्दाचार्य जी जन्मतिथि के अवसर पर कोई मुख्यमंत्री पधारे हो। उन्होंने इस कार्यक्रम में पधारने के लिए मुख्यमंत्री का स्वागत व अभिनंदन किया।
इस अवसर पर स्वामी चिदानंद महाराज ने अपने उद्बोधन में आज के दिन को महत्वपूर्ण दिवस बताते हुए कहा कि जाति-पाति पूछे नहीं कोई, जो हरि को भजे वह हरि का होई, यह केवल सांस्कृतिक उद्घोष नहीं है, बल्कि यह सनातन का शंखनाद है। कहा कि विकट समय में समाज को एक नई दिशा जगद्गुरू रामानन्दाचार्य ने प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह वह मंत्र है जो आज के समाज की विकट समस्याओं का समाधान है। उन्होंने कहा कि जगद्गुरू रामानन्दाचार्य ने यह साफ संदेश दिया कि आज कुल की नहीं बल्कि कर्मों की आवश्यकता है, कुल की नहीं बल्कि करूणा की आवश्यकता है। कहा कि कुल कोई भी हो सकता है, लेकिन जीवन में करूणा हो, वंश कोई भी हो सकता है, लेकिन जीवन में एक विश्वास हो सनातन के प्रति। उन्होंने कहा कि यह मंत्र आने वाले समय के लिए बड़ा वरदान बन सकता है। उन्होंने कहा कि हमें एक होकर अपने देश के साथ खड़े रहना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में चहुमुखी विकास के कार्य हो रहे है। प्रदेश माफिया व अपराध मुक्त बना है तथा प्रदेश में कानून का शासन है। उन्होंने कहा कि आज माघ मेला ऐसा सजा है, जैसे अर्धकुम्भ का मेला हो, अर्धकुम्भ ऐसा लगता है, जैसे कुम्भ का मेला हो, कुम्भ का मेला महाकुम्भ बन गया। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ का भव्य, दिव्य, सकुशल आयोजन की पूरे विश्व में गूंज है।
इस अवसर पर उपस्थित अन्य पूज्य संत-महात्माओं के द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किए गए।
इस दौरान स्वामी रामदिनेशाचार्य, स्वामी राघवाचार्य, जगद्गुरु वैदेही वल्लभ देवाचार्य, स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, महंत वैष्णव दास, महंत राजेंद्र दास, मोहन दास, महामंडलेश्वर जनार्दन दास महाराज, महंत बलवीर गिरि, अवधेश दास, जन्मेजय शरण, शशिकांत दास, विद्या चौतन्य, दामोदर दास, यमुना पुरी, रामहृदय दास, लाखन दास, शुक्रायु दास महाराज व अन्य पूज्य संत-महात्माओं के अलावा कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’, विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह, हर्षवर्धन वाजपेयी, पीयूष रंजन निषाद, दीपक पटेल, गुरु प्रसाद मौर्य, पूर्व सांसद श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी, विनोद सोनकर, आदि सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

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