दिखा चांद, ईद आज, ईदगाहों-मस्जिदों में अदा कि जाएगी ईद की नमाज- आदिल रशीद

दिखा चांद, ईद आज, ईदगाहों-

मस्जिदों में अदा कि जाएगी ईद 

की नमाज- आदिल रशीद

मौलाना कुतुबुद्दीन

मुफ्ती क़मर आलम

मुफ्ती अनवर कासमी


रांची: ईद का चांद शुक्रवार 20 मार्च 2026 की शाम दिखा, शनिवार को ईद मनाई जाएगी।एदारे शरिया झारखंड और इमारते शरिया झारखंड ने चांद की औपचारिक रूप से घोषणा कर दी हैं। चांद का दीदार होने के साथ ही ईद की खुशियां शहर की फिजा में घुल गई। मस्जिदों में ईद नमाज़ से संबंधित एलान हुए, जबकि सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लगा रहा। लोग एक दूसरे को ईद की चांद की बधाई देते रहे।

शहर के विभिन्न मुस्लिम मोहल्लों में खुशी के इस मौके पर पटाखे छोड़े गए। ईद की तैयारियां रात से ही शुरू कर दी गईं। सभी मुस्लिम मोहल्लों, चौक चौराहों, गली कूचों को कुमकुमे, चमचमाती रंग बिरंगे झालर, लाइट से सजाया गया। बच्चो ने रात रात भर जाग कर सजाने का काम किया।

देर रात तक होती रही खरीदारी

ईद का चांद का ऐलान होते ही बाजारों में उमड़ी भीड़। हर कोई खरीदारी करते नज़र आए। सेवई, लच्छा की दुकानों में भीड़ रही। कपड़ा की दुकान, राशन दुकान, पानी पूरी ठेला, मेवाड़, आदि सभी जगहों पर भीड़ रही। देर रात तक होती रही खरीदारी।

महिलाओं ने पकवान बनाने में जुटे रहे

चांद का ऐलान होते ही मुस्लिम घरों में महिलाओं ने पकवान बनाने में जुट गई। छोला चाट, पानी पूरी, दही बाड़ा, बिरयानी, पुलाओ, हलवा, लच्छा, सेवई, गुलाब जामुन आदि पकवान बनाने में जुटी रही।

कर्बला चौक में लगा झूला

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कर्बला चौक के पास झूला लगा। झूला के आसपास कई खाने पीने के स्टॉल लगाए गए।

सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम

रांची जिला पुलिस प्रशासन के द्वारा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम है। हर जगह पुलिस के जवान तैनात थे। चप्पे चप्पे पर पुलिस की जवान तैनात रहे। जिला के कप्तान ने कहा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम है। आप लोग ईद सरहुल, रामनवमी सब इत्मीनान से भाईचारे के साथ अपना त्यौहार को मनाएं।

ईद का त्यौहार पूरी ईमानी बेदारी के साथ मनाए: मुफ्ती अनवर कासमी

रांची: इमारत शरिया के काज़ी मुफ्ती मुहम्मद अनवर कासमी ने कहा की ईद उल फितर एक बड़ा इस्लामी त्यौहार है। ईद की खुशी में अपने आस-पड़ोस और मोहल्ले के ऐसे लोगों को ईद की खुशी में शामिल करें जो कमजोर हो, उनकी मदद करें। और उनकी मदद इस अंदाज में किया जाए कि उनकी इज्जत को ठेस ना लगे। ईद का त्यौहार पूरी ईमानी बेदारी के साथ मनाया जाए। ईतमिनान व सकून के साथ नमाज के लिए आए और जाएं। इस्लाम के पैगाम को आम किया जाए, और यह कोशिश की जाए कि आप से किसी को तकलीफ ना पहुंचे। ईद में अल्लाह पाक रोजा और तरावी के बदले इनाम से नवाजता है। इसलिए अल्लाह पाक से खूब दुआ करें, ईद की नमाज के बाद दुआ कुबूल होती है।

*जमीयत उलेमा की तरफ से ईद का पैगाम

जमीयत उलेमा-ए-झारखंड के महासचिव हाजी शाह उमैर ने ईद-उल-फितर के मौके पर एक पैगाम जारी किया है, जिसमें उन्होंने मुसलमानों से अपील की है कि वे ईद की खुशियों में गरीबों और जरूरतमंदों को शामिल करें और उन्हें ईद की मुबारकबाद दें। शाह उमैर ने कहा है कि ईद का त्योहार हमें सिखाता है कि हम सभी एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं और हमें एक-दूसरे के साथ प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए। ईद की नमाज अदा करने से पहले सदकात-ए-फितर अदा करें और गरीबों की मदद करें। एक-दूसरे के साथ प्यार और सम्मान से पेश आएं और समाज में शांति और एकता को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा है कि ईद का त्योहार हमें एकता, भाईचारे और मानवता का संदेश देता है।

हाजी शाह उमैर महासचिव जमीयत उलेमा झारखंड

सदका फितरा अदा करने के लिए मालदार होना जरूरी नहीं: मौलाना कुतुबुद्दीन

रांची: एदारा ए शरिया झारखंड के नाजिम आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने ईद के पैगाम में कहा कि रमजान महीने के आखिर में सदका फितरा अदा करना है। इसके पीछे हिक्मत (सोच) यह है कि इसकी अदायगी करने से एक तो गरीबों को खाने को कुछ मिलता है और दूसरा रोजेदार द्वारा रोजे के दौरान की गई गलतियों और फुजूल कामों का कफ्फारा अदा हो जाता है। सही बुखारी और सही मुस्लिम के अनुसार, एक हदीस है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सदक़ा फितरा को अनिवार्य (करार) दिया। सदका फितरा रमजान के महीने के अंत में ईद की नमाज से पहले हर मुसलमान, गुलाम, आजाद, मर्द, औरत, बच्चे, बूढ़े, एक सा (लगभग ढाई किलो) रोजाना खाने वाली चीजों में से अदा करना यानी निकालना है। अगर ईद की नमाज़ के बाद सदक़ा फित्रा दिया जाए तो वह आम सदका में से एक होगा। फितरा अदा नहीं होगा। ईद की नमाज़ से पहले सदक़ा फ़ितरा निकालना सही है। सदक़ा फितरा केवल अनाज के रूप में अदा करना बेहतर है। लेकिन यदि इस अनाज का मूल्य यानी नकद भी बतौर फितरा में दिया जाता है, तो यह सही है। सदका फितरा केवल गरीबों और बेसहारा (मिस्किन) लोगों को दिया जाएगा।

ईद का पैगाम

अपने दिल में किसी के प्रति कोई द्वेष या नफरत नहीं रखनी चाहिए

ईद के पैगाम में अशरफ़ खान चुन्नू खान पूर्व डिप्टी मेयर उम्मीदवार सह पठान तंजीम के संरक्षक ने कहा कि ईद का त्योहार चैन, अमन खुशी से मनाए। नफ़रत फैलाने वालो से भी मुहब्बत बांटे। मुहब्बत है तो हिंदुस्तान है, मुहब्बत नहीं तो कुछ नहीं। ईद मोहब्बत, भाईचारा, और एकता का। यह दिन हमें सिखाता है कि हम सभी एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं और हमें एक-दूसरे के साथ प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए। ईद के मौके पर, हमें अपने आसपास के लोगों के साथ जुड़ने और उनकी मदद करने की कोशिश करनी चाहिए। हमें अपने समाज में शांति और एकता को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए। हमें अपने विचारों और भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना चाहिए और दूसरों की बात सुननी चाहिए। ईद का त्योहार हमें क्षमा और परोपकार का भी संदेश देता है। यह दिन हमें सिखाता है कि हमें अपने दिल में किसी के प्रति कोई द्वेष या नफरत नहीं रखनी चाहिए। हमें अपने दुश्मनों को भी माफ करना चाहिए और उनके साथ भी प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए।

अशरफ़ खान चुन्नू खान पूर्व डिप्टी मेयर उम्मीदवार सह पठान तंजीम के संरक्षक।

ईद: एकता और भाईचारे का संदेश

हाजी साहेब अली गद्दी ने कहा कि आज पूरे देश में ईद का त्योहार बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर, हम सभी को एक साथ मिलकर प्यार, भाईचारे, और एकता का संदेश फैलाने का अवसर मिला है। ईद का त्योहार हमें सिखाता है कि हम सभी एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं और हमें एक-दूसरे के साथ प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए। यह दिन हमें क्षमा और परोपकार का भी संदेश देता है। ईद, सरहुल, रामनवमी ये सभी त्यौहार अपना है। इसे अपना समझ कर मनाएं। 18 वर्ष से नीचे आयु वाले लड़के को गाड़ी न दें। इस मौके पर, हम सभी से अपील करते हैं कि वे अपने आसपास के लोगों के साथ जुड़ें, उनकी खुशियों में शामिल हों, और उनकी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करें। आइए हम सभी इस संदेश को अपने जीवन में अपनाएं और एक बेहतर समाज बनाने के लिए काम करें। हाजी साहेब अली गद्दी उपाध्यक्ष ऑल इंडिया गद्दी समाज, सदस्य चैंबर ऑफ कॉमर्स, सदस्य झारखंड काउंसिल फिजियोथेरेपी।

ईद भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देती है,शहर काज़ी रांची: मोहम्मद क़मर आलम क़ासमी

रांची/झारखंड ईद-उल-फितर के मौके पर मौलाना मोहम्मद क़मर आलम क़ासमी ने कहा कि ईद सिर्फ खुशी का त्योहार नहीं, बल्कि भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि हमें गरीबों और ज़रूरतमंदों को अपनी खुशियों में शामिल करना चाहिए। उन्होंने अपील की कि लोग ईद सादगी से मनाएं, आपसी मनमुटाव खत्म करें और समाज में प्यार व सौहार्द को बढ़ावा दें।

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