महामहिम राज्यपाल, उत्तर प्रदेश एवं
अध्यक्ष, इलाहाबाद संग्रहालय समिति
श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने इलाहाबाद संग्रहालय
में सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका
का उद्घाटन किया तथा वीथिका के
पूर्ण डिजिटलीकरण के निर्देश दिए
अनुभव वीथिका का अवलोकन कर दिव्यांग बच्चों से संवाद किया तथा उनके लिए वाइल्डलाइफ सेंचुरी एवं अयोध्या राम मंदिर भ्रमण की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
साहित्यिक वीथिका पर आधारित कैटलॉग का विमोचन किया तथा विभिन्न दिव्यांग विद्यालयों के विद्यार्थियों को बैग, चॉकलेट एवं आम के पौधे वितरित किए।
प्रयागराज। महामहिम राज्यपाल, उत्तर प्रदेश एवं अध्यक्ष, इलाहाबाद संग्रहालय समिति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज इलाहाबाद संग्रहालय में हिंदी साहित्य एवं साहित्यकारों पर केंद्रित सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका का उद्घाटन किया। संग्रहालय आगमन पर उन्होंने सर्वप्रथम परिसर स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
उद्घाटन के उपरांत मंडलायुक्त एवं निदेशक, इलाहाबाद संग्रहालय ने महामहिम राज्यपाल को वीथिका का भ्रमण कराते हुए वहां संरक्षित साहित्यिक धरोहरों से अवगत कराया। इस दौरान महामहिम राज्यपाल ने वीथिका में प्रदर्शित विभिन्न साहित्यिक धरोहरों का अवलोकन करते हुए खड़ी बोली एवं अवधी के भाषायी स्वरूपों के अंतर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कविवर सुमित्रानंदन पंत से संबंधित ज्ञानपीठ सम्मान, स्मृति चिह्न एवं वाग्देवी की प्रतिमा का अवलोकन किया। साथ ही पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की ऐतिहासिक कलम एवं परिधानों का अवलोकन किया तथा उनकी कृति 'आराधना' के तृतीय अध्याय का अध्ययन किया। पंत जी को समर्पित प्रदर्श पटल के समक्ष उन्होंने उनकी प्रसिद्ध पंक्तियां "न जाने नक्षत्रों से कौन, निमंत्रण देता मुझको मौन" पढ़ीं तथा उनका भावार्थ भी समझाया। उन्होंने साहित्यिक वीथिका के पूर्ण डिजिटलीकरण के निर्देश दिए, ताकि यह साहित्यिक धरोहर अधिकाधिक लोगों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।
सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका हिंदी साहित्य के छायावादी युग की समृद्ध विरासत को समर्पित है। इसमें सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', महादेवी वर्मा, बालकृष्ण भट्ट, श्रीधर पाठक, मुंशी प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, नरेश मेहता, हरिवंश राय बच्चन तथा प्रो. रामकुमार वर्मा से संबंधित दुर्लभ कृतियों, पत्रों एवं साहित्यिक सामग्री का संरक्षण किया गया है। यह वीथिका हिंदी साहित्य की कविता, पत्रकारिता, उपन्यास एवं कहानी साहित्य की समृद्ध विकास यात्रा को सजीव रूप में प्रस्तुत करती है।
इसी क्रम में महामहिम राज्यपाल ने दिव्यांगजनों के लिए विकसित अनुभव वीथिका का अवलोकन कर वहां उपस्थित दिव्यांग बच्चों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ऐतिहासिक स्मारकों, मंदिरों एवं वन्यजीवों के स्पर्श आधारित मॉडलों के संबंध में बच्चों के अनुभव जाने तथा उनके लिए वाइल्डलाइफ सेंचुरी भ्रमण का प्रस्ताव रखा। संवाद के दौरान एक बालिका द्वारा 'विकलांग' के स्थान पर 'दिव्यांग' शब्द से मिलने वाले सम्मानजनक भाव को व्यक्त किए जाने पर महामहिम राज्यपाल भावुक हो गईं। उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से चॉकलेट वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
तत्पश्चात संग्रहालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में निदेशक, इलाहाबाद संग्रहालय ने महामहिम राज्यपाल का शॉल, पौधा एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल ने सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका पर आधारित कैटलॉग का विमोचन किया तथा विभिन्न दिव्यांग विद्यालयों से आए विद्यार्थियों एवं उनकी शिक्षिकाओं को बैग एवं आम के पौधों का वितरण किया।
अपने संबोधन में महामहिम राज्यपाल ने 'साझा करना ही संवेदनशीलता का वास्तविक परिचायक है' की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में उपलब्ध संसाधनों एवं अवसरों को साझा करने की भावना सामाजिक समरसता को सुदृढ़ बनाती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी वस्तु का अभाव हो तो सहयोग एवं सहभागिता की भावना से उसका समाधान सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने निरीक्षण एवं आत्मनिरीक्षण के महत्व पर बल देते हुए प्रत्येक व्यक्ति को निरंतर आत्ममूल्यांकन करने की आवश्यकता बताई। राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को उसके भाव एवं अर्थ से परिचित कराने का आह्वान किया। गुजरात की एक नहर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उसका नाम 'सुजलाम् सुफलाम्' शब्दों से प्रेरित है। साथ ही उन्होंने मंडलायुक्त को निर्देशित किया कि दिव्यांग बच्चों के लिए वाइल्डलाइफ सेंचुरी एवं अयोध्या राम मंदिर के भ्रमण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन तथा एनआरआई (प्रवासी भारतीय) निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', जिलाधिकारी प्रयागराज मनीष वर्मा, उपनिदेशक, दिव्यांगजन कल्याण विभाग अभय कुमार श्रीवास्तव, अशोक कुमार, डॉ. अजय कुमार मिश्र, श्रीमती श्वेता सिंह, डॉ. वामन आनंद राव वानखेड़े, धीरेश जोशी, सुनील कुमार पाण्डेय, डॉ. सुशील सहित संग्रहालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बचपन डे केयर सेंटर, प्रयागराज के 40, जीवन ज्योति इंस्टीट्यूट, सारनाथ, वाराणसी के 23, दिव्य ज्योति निकेतन, नाजरेथ हॉस्पिटल की इकाई के 10 तथा उत्तर प्रदेश मूकबधिर विद्यालय, जॉर्ज टाउन, प्रयागराज के लगभग 30 श्रवण, बौद्धिक एवं दृष्टि दिव्यांग बच्चों तथा उनके शिक्षकों ने प्रतिभागिता की। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संजू मिश्रा, सहायक संग्रहाध्यक्ष एवं प्रभारी, साहित्यिक वीथिका द्वारा किया गया।


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