कौन है वो मां जिन्होंने चिता की अग्नि पर सेक कर खाना खाया था और अपने पति को भी अपने बड़े बेटे के रूप में उन्होंने अपनाया था

कौन है वो मां जिन्होंने चिता की अग्नि पर 

सेक कर खाना खाया था

और अपने पति को भी अपने बड़े बेटे के 

रूप में उन्होंने अपनाया था


वैसे तो हम बहुत बड़ी बड़ी बात करते हैं, बेटियों की रक्षा करने के लिए, सुरक्षा के लिए, लेकिन जब बेटी सच में मुसीबत में आ जाती है, तो वह उन्हें सच में ही मुसीबत लगती है, और माता-पिता भी साथ छोड़ने को तैयार हो जाते हैं अपनी बेटी का! उनको अपनी बेटी से ज्यादा समाज की चिंता लगी रहती है ना,कि समाज क्या कहेगा, लेकिन जब उसी बेटी को समाज, देश स्वीकार कर लेता है,तब वही माता-पिता आकर कहते हैं कि ये हमारी बेटी है, हमारी! बड़े स्वार्थी और मतलबी रिश्ते हैं यहां सभी के!
ऐसी ही संघर्ष भरी कहानी इस छोटी-सी बच्ची की शुरू हुई थी,जिनका नाम है सिंधुताई सपकाल! जब वह पैदा हुई थी तब माता पिता को वह बोझ ही लगी थी, इसलिए उनका नाम चिंद रख दिया जिसका अर्थ होता है फटा हुआ कपड़ा! मात्र 8 वर्ष की उम्र में 30 वर्ष के व्यक्ति से सिंधुताई की शादी कर दी गई! और सिंधु ताई के जीवन में यहां से संघर्ष शुरू हो गया था! सिंधू ताई का पति इतना मक्कार था कि वह उनको रोज मारता और पीटता था और जब वह 20 वर्ष की उम्र की थी, वह जब गर्भवती थी,तब उनको उनके पति ने घर से बाहर निकाल दिया था, तब उनको अपनी बच्ची को जन्म देने के लिए गौमाता के तबेले का सहारा लेना पड़ा था! तब उनकी रक्षा किसी और ने नहीं गौमाता ने की थी!
बेटी को जन्म देने के बाद उनके पति ने उनको घर में नहीं घुसने दिया और तब सिंधुताई अपनी बेटी को लेकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर रहने लगी थी, वहीं पर रहकर भीख मांग कर अपना पेट भरती थी! और जालिमों से अपनी बच्ची और खुद को बचाने के लिए, रात को शमशान में जाकर सोती थी, और बहुत बार उन्होनें शमशान की चिता में खाना सेक कर खाया!
उन्होेंने रेलवे स्टेशन पर बहुत सारे बच्चों को भीख मांगते हुए देखा और उन बच्चों को देखकर उनकी ममता जाग उठी थी, सिंधुताई इन बच्चों की मां बन चुकी थी, पूरे दिल के साथ सिंधुताई ने इन बच्चों को अपना प्यार दिया, और वह भी उनके लिए और ज्यादा भीख मांग कर,उनका पेट भरने लगी थी, उनका कहना था कि बच्चों का पेट भरने के लिए मां किसी के सामने हाथ फैला सकती हैं मुझे कोई शर्म नहीं!
देखते ही देखते वह हजारों बच्चों की मां बन गई थी! और इस तरह से देख कर लोगों ने उनको सहारा देना शुरू कर दिया था और आज वह 1400 बच्चों की मां है, वह सिर्फ मां ही है, उनका कहना है कि अगर मेरी मां मुझको उस समय गले लगा लेती तो मुझे मां होने का आभास ना होता, जो यह मुझे आज हो रहा है!
आज सिंधुताई के 14 बच्चों में कोई डॉक्टर है इंजीनियर है और कोई कुछ है, और ना जाने इन बच्चों ने कितने तो अनाथ आश्रम वृद्ध आश्रम खोल दिए हैं! सिंधुताई की 250 से अधिक बहू हुए हैं! और इससे भी अधिक उनके पोते और नाती पोती है! इनके एक बेटे ने तो सिंधुताई के ऊपर पीएचडी कर डाली है! सिंधुताई के इस बेटे का कहना है, कि सिंधुताई अपने आप में एक पूरा सब्जेक्ट है,जिस पर पीएचडी की जा सकती है!
80 साल की उम्र में इनके पति को आभास हुआ, कि मैंने अपनी पत्नी के साथ बहुत गलत किया था, जब वह अकेले रह गए, तब सिंधुताई से माफी मांगने के लिए आए, और बोले कि मुझे तुम अब अपना लो,सिंधुताई ने उनको अपनाया, लेकिन पति के रूप में नहीं, अपने बड़े बेटे के रूप में, सिंधुताई का कहना था वह सिर्फ अब एक मां है सिर्फ मां, पत्नी नहीं!
आज सिंधुताई के ऊपर हजारों कहानी कविताएं लिखी जा चुकी हैं, और उनको राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं, देश के जाने माने कलाकार उनके पैर छूते हैं! विदेशों में भी उनकी सीख लेकर उनसे बहुत कुछ सीख रहे हैं लोग! ऐसी सिंधुताई मां को कोटि-कोटि प्रणाम नमन!
लेखिका डॉ हर्ष प्रभा
उत्तर प्रदेश
समाज सेविका पर्यावरणविद एवं लेखिका डॉ हर्ष प्रभा
गुडविल एम्बेसडर विवेकानंद वर्ल्ड पीस फाउंडेशन
मातृ मंडल सेवा भारती

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