पुलिस हिरासत है डराती । दो फुट से आरोपी ने कैसे लगा ली फाँसी?

पुलिस हिरासत है डराती । दो फुट से 

आरोपी ने कैसे लगा ली फाँसी?





 उत्तर प्रदेश के कासगंज मे एक नाबालिग लड़की को भगाने के आरोप मे पुलिस द्वारा पकड़े गए युवक की पुलिस हिरासत मे दो फिट की लगी नल की टोटी से आरोपी युवक द्वारा अपनी जैकेट मे लगी डोरी से फाँसी लगा कर आत्महत्या करना ? क्या संभव है?? तो इसका जवाब है बिल्कुल नही। जब पुलिस हिरासत मे पकड़े गए युवक का कद 5.5 हो फाँसी के लिये जैकेट की डोरी इस्तेमाल की हो जो वजन पड़ने के साथ खिंच कर लंबी हो जाती है। तो फाँसी लगा कर आरोपी द्वारा आत्महत्या करना लगभग संभव ही नही।
दो फुट की ऊँचाई से जानवर बकरा फाँसी लग कर नही मरेगा। तो पुलिस हिरासत मे 5.5 फुट के कद का युवक कैसे दो फुट के नल मे फाँसी लगाकर मर गया ??
अगर 5.5 कद के किसी व्यक्ति द्वारा आत्महत्या की प्रबल इच्छा शक्ति द्वारा भी 5 फुट की ऊँचाई से फाँसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया जाय तो भी व्यक्ति नही मरेगा जब तक पैरों का स्पर्श पृथ्वी से रहेगा। फाँसी द्वारा आत्महत्या के लिये जमीन से पैरों की ऊँचाई जरूरी है और पैर जमीन को स्पर्श ना करे तभी फाँसी द्वारा किसी की मृत्यु संभव है। अगर कोई व्यक्ति अपनी ऊँचाई के कद से कम किसी भी ऊँचाई से फाँसी लगाता है तो गले पर दवाब पड़ते ही सांस रुकने के साथ ही दम घुटेगा और बिना कुछ सोचने विचारने की क्षमता को क्षीण करते हुए दिमाग शरीर को बचाने के लिये सबसे पहले पैरों पे खड़े होने का संकेत करेगा इसलिए अपने कद से कम ऊँचाई से फाँसी लगाकर मरना संभव नही ।
पुलिस हिरासत मे किसी युवक की आत्महत्या द्वारा मरने का मामला कोई नया नही है ना जाने कितने अनगिनत मामले है जिसके विषय मे मेरा मानना है पुलिस हिरासत मे शत प्रतिशत आत्महत्या के मामले आत्महत्या के नही हत्या के मामले है। जाँच चाहे न्यायिक हो या किसी जाँच कमेटी द्वारा कितनी सही और निष्पक्ष होती है सब राम भरोसे ही है इसका भी एक कारण है भारत मे अपराध शास्त्रियों की कमी और जो है उनके अध्ययनों के लिये अच्छे संसाधन का ना होना एवं अभाव । जिस कारण समाज मे बढ़ते अपराध के साथ सफेद पोशों अपराधों पे नियंत्रण लगभग मुश्किल ही है। जब तक व्यवस्थाये ठीक नही होगी तब तक समाज मे ऐसे मामलों के बढ़ने के साथ देश मे शासनिक हो या प्रशासनिक इनको दी शक्तियों का दुरुपयोग होता रहेगा।
(मृदुल श्रीवास्तव)

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