इमाम हुसैन का ज़िक्र इंसान को सत्य और न्याय का मार्ग दिखाता है : मौलाना तहज़ीबुल हसन रिज़वी

इमाम हुसैन का ज़िक्र इंसान को 

सत्य और न्याय का मार्ग दिखाता 

है : मौलाना तहज़ीबुल हसन रिज़वी



हसन मेंशन, गढ़ हुसीर कांके में मजलिस-ए-ज़िक्रे इमाम हुसैन का आयोजन

रांची: हसन मेंशन, गढ़ हुसीर कांके स्थित सैयद शाहरुख हसन रिज़वी के आवास पर ज़िक्रे इमाम हुसैन की एक गरिमामयी एवं आध्यात्मिक मजलिस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, उलेमा-ए-किराम तथा बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।

मजलिस को संबोधित करते हुए मस्जिद जाफरिया रांची के इमाम व खतीब तथा प्रसिद्ध धर्मगुरु मौलाना अलहाज सैयद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने कहा कि शिया और सुन्नी दोनों एक ही अल्लाह, एक ही रसूल और एक ही कुरआन पर ईमान रखते हैं। इसलिए मुसलमानों के बीच किसी प्रकार के भेदभाव और विभाजन की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक शक्तियां अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए मुसलमानों को विभिन्न वर्गों में बांटने का प्रयास करती हैं, जबकि इस्लाम एकता, भाईचारे और आपसी सद्भाव का संदेश देता है।

मौलाना ने कहा कि हम यज़ीदियत का नहीं, बल्कि हज़रत इमाम हुसैन और उनकी महान कुर्बानियों का ज़िक्र करते हैं। इमाम हुसैन का ज़िक्र इंसान को हक़ और बातिल के बीच अंतर करना सिखाता है तथा अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने का साहस प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मुसलमान केवल नाम से नहीं, बल्कि अपने चरित्र, नैतिकता और कर्मों से मुसलमान बनता है। मज़लूमों का साथ देना और सत्य का समर्थन करना सबसे बड़ी इबादत है।

मौलाना तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने कर्बला की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, स्वतंत्रता, धैर्य और सत्यनिष्ठा का महान संदेश है। हज़रत इमाम हुसैन ने अपने अहलेबैत और साथियों के साथ ऐसी मिसाल पेश की, जो क़यामत तक सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने पूर्वजों के इतिहास, अहलेबैत की शिक्षाओं और कर्बला के संदेश का अध्ययन करें, क्योंकि यही शिक्षाएं उन्हें चरित्रवान, साहसी और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करेंगी। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपने धर्म के साथ-साथ अपने देश के प्रति भी प्रेम, निष्ठा और जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया तथा समाज में शांति, प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील की। मजलिस के समापन पर मेज़बान सैयद शाहरुख हसन रिज़वी ने सभी मेहमानों, उलेमा-ए-किराम और प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपस्थित लोगों के बैठने और भोजन आदि की उत्कृष्ट व्यवस्था की, जिसकी सभी ने सराहना की। इस अवसर पर मोहम्मद सुरूर, डॉ. मुबारक अब्बास, अमीर गोपालपुरी, कासिम अली, अमूद अब्बास, इक़बाल फ़ातमी, हाफ़िज़ मुदस्सिर इक़बाल, डॉ. शमीम हैदर, सुहैल सईद, अफ़ज़ल दुर्रानी, असगर इमाम सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।

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